आँखों ने तो जैसे
एक चेहरे पे ही नज़र जा टिकाई,

बार-बार देखने को दिल चाह रहा था,
पर हमें तो ऐन मौके पे ये शराफत की हिचक आई।

अरे थोड़ी बहुत निगाहें
उनकी आँखों ने भी हमारी तरफ क्या झलकाई,

६ घंटे के ट्रेन के इंतज़ार का समय ऐसे निकला,
जैसे ढलते शाम में किसी की परछाई।।

Image credits: Saatchi Art “waiting,” by Jacqueline Hoebers