(शत्रुओं से मेरा औचित्य देश के आंतरिक और बाह्य, दोनों शत्रुओं से है। ललकार देश प्रेमियों को भी अपना पौरुष जगाने की है।)

तुम कल-कल कल-कल करते रहो
हम आज ही कर दिखा देंगे,
तुम क्षण-क्षण प्रतिक्षण गंवाते रहो
हम प्रत्येक क्षण जान लगा देंगे।

तुम मार्ग अवरूद्ध कराते रहो
हम मार्ग नये निकाल देंगे,
पर्वत-सागर चीर हम
देवालय-सेतु बना देंगे।।

भारत है ये, नहीं कल का
कोई मज़हबी मुल्क है,
न ये अपने ही जनों की
हत्या करे वो चीन है।

भारत है ये राष्ट्र प्राचीन
भारत की बात बताता हूँ,
सनातन सभ्यता, सनातन संस्कृति
सनातन भाषा-नृत्य-संगीत
सनातन ग्रंथ, सनातन धर्म
सनातन योग-विद्या-आयुर्वेद
आदि-अनादि-अनंत वीरों की
गाथा-गुण-गान गाता हूं।।

गया वो भारत नेहरू-गांधी का
एक नवीन भारत बनाना है,
सुभाष-पटेल सा दृढ़ निश्चय ले
शत्रुओं को ठोक-पीट बजाना है।

सुन लो शत्रुओं ललकार हमारी
अब कलम पर प्रत्यंचा चढ़ा देंगे,
कब्र तो तुम खोद रहे हो अपनी
कफ़न हम तुम्हें ओढ़ा देंगे।

कहता हूं मैं बात सीधी सी
इतिहास तुम अपनी जान लो,
भारत की ही सन्तान हो तुम दो
सत्यता अपनी पहचान लो।।

काल-चक्र न रुका कभी है
काल प्रबल अविनाशी है,
प्राचीन काल से महाकाल को पूजें
हम उसी भारत के वासी हैं।

जैन तीर्थंकर, बौद्ध भिक्षु
ब्राह्मण व सन्यासी हम,
अधर्म का सर्वनाश करे वो
परशुराम, भग्वा-धारी हम।।

ये कविता चेतावनी नहीं
बस केवल एक ललकार है,
सत्य जो तुम जान लेते अपनी
तो प्रेम हममें भी अपरंपार है।।

Featured image: Kandariya Mahadeva Temple, Khajuraho.
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