१४ सितंबर को भारत में हिन्दी दिवस मनाया जाता है। हिन्दी विश्व की सर्वाधिक प्रचलित भाषाओं में से है। यूट्यूब में भी सबसे अधिक प्रचलन में हिन्दी के चलचित्र ही हैं। परन्तु दुख की बात ये है कि ये हिन्दी नहीं है। जो बोलचाल में, प्रचलन में है वो खिचड़ी है। खिचड़ी में फारसी, अरबी, अंग्रेज़ी के शब्दों से मुझे विशेष रूप से आपत्ति है। हाँ, भारतीय भाषाओं की खिचड़ी हो रही हो जैसे मारवाड़ी, बुन्देलखण्डी, छत्तीसगढी, आदि; तो मुझे कोई आपत्ति नहीं। ऐसा क्यों?

देखिए, एक भाषा उस क्षेत्र की, वहां की संस्कृति की आत्मा होती है। उस आत्मा में आप विदेशी भाषाओं के शब्दों को, जिनका आपको मूल अर्थ भी नहीं पता, अपनी मूढतावश समाज के एक वर्ग (जैसे सिनेमा, हिन्दी गीतों) में चली आ रही भाषीय विकृतियों को बढावा देते जाते हैं और आपको ज्ञात भी नहीं होता। शायद आपको ज्ञात न हो पर भारत के विभाजन में उर्दू भाषी नेताओं, शायरों का सबसे बड़ा योगदान था। इन्हीं उर्दू को महान बताने वालों ने पाकिस्तान और कश्मीर में जाके उर्दू थोप दी। ज्ञात हो कि दोनों स्थानों, पाकिस्तान व कश्मीर में ३ प्रतिशत से भी कम लोगों की मातृ भाषा उर्दू थी। इसी उर्दू के कारण बांग्लादेश अलग हुआ और लाखों बंगाली बंधुओं का नरसंहार हुआ। मैं यहां सारे उर्दू भाषी लोगों को बुरा भला नहीं कह रहा हूं। मेरा कहना ये है की कई उर्दू भाषी जान बूझकर उर्दू को हिन्दी में मिला कर परोसते हैं और हिन्दी का सत्यानाश कर देते हैं।

हिन्दी के भारत में ही कई सुन्दर रूप में। अवधी में रामचरितमानस हो या ब्रज में सूरसागर।

नाथ शंभु धनु भंजन हारा
होईये कोऊ इक दास तुम्हारा।

भारतीय भाषाओं के न केवल काव्य अद्वितीय हैं, उनके मूल अर्थ भी अत्यंत सुंदर हैं और हमारी प्राचीन संस्कृति के परिचायक हैं। उदाहरण के लिए ये देखें:

मेरा सभी पाठकों से निवेदन है कि निम्न लिखित वार्ता को अवश्य देखें।

नित्यानंद मिश्रा: अरबी-फ़ारसी मुक्त हिन्दी: बाज़ारू खिचड़ी से आर्यभाषा तक।

तमिल, मलयालम, कन्नड, गुजराती, मराठी, बंगाली, उड़िया, नेपाली, आदि क्षेत्रीय भाषी जनों को अपनी भाषा पे, उसकी शुद्धता पे अभिमान होता है और वे उनकी रक्षा भी करते हैं। परंतु बहुतेरे हिन्दी भाषी अधिकतर अज्ञानवश और कई बार जान बुझकर हिन्दी में मिलावट करते हैं।

हिन्दी विश्व की प्राचीनतम व महानतम भाषा संस्कृत से निकली है। शुद्ध हिन्दी आपको संस्कृत की ओर ले जाएगी। और संस्कृत आपको भारत की महान संस्कृति, महान काव्यों, रचनाओं, ज्ञान-विज्ञान, ग्रंथों, इतिहास, वेद, उपनिषद, पुराणों की ओर ले जायगी।

अन्यथा आप किसी भी महिला को औरत कह कर उसका अपमान करते रहेंगे और आपको इसका कभी आभास भी नहीं होगा।

वंदे मातरम्।